बड़वानी, 09 जनवरी 2026।
निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट)
बड़वानी नगर में आज का सूर्योदय धर्म और आध्यात्म के अनूठे संगम के साथ हुआ। जैन धर्म की सुप्रसिद्ध गणिनी आर्यिका मां सृष्टिभूषण मति जी माताजी ससंघ का नगर में प्रथम बार भव्य मंगल प्रवेश हुआ। भोपाल में चातुर्मास के पश्चात विभिन्न सिद्ध क्षेत्रों की वंदना करते हुए माताजी का आगमन बड़वानी की धरा पर हुआ, जहाँ समाज जनों ने पलक पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया।
पाद प्रक्षालन और मंगल अगवानी
माताजी के नगर आगमन पर जैन समाज के श्रावकों ने भारी उत्साह के साथ अगवानी की। समाज जनों ने आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। विशेष बात यह रही कि यहाँ पूर्व से विराजित मुनि श्री प्रणुत सागर जी के संघस्थ क्षुल्लक विनियोग सागर जी ने भी अगवानी में सहभागिता की। जिन मंदिर में दर्शन के उपरांत आर्यिका संघ और मुनि श्री प्रणुत सागर जी का मंगल मिलन हुआ, जो कि श्रद्धालुओं के लिए भावुक क्षण था।
धर्म सभा में माताजी के तीखे और मीठे प्रवचन
आयोजित धर्म सभा में आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ने अपने काव्यात्मक और रोचक अंदाज में पाश्चात्य संस्कृति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “जिसका प्रभु से वास्ता, वही सच्चा नाश्ता है।” माताजी ने समाज को आइना दिखाते हुए कहा कि आज की पीढ़ी संस्कार भूल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर में किए गए पाप कहीं भी प्रक्षालित नहीं होते, इसलिए जीवन में शुचिता जरूरी है। वहीं मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने माताजी के आगमन को मंदिर कार्य प्रारंभ होने के लिए एक शुभ मंगल संकेत बताया।
क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी का अवतरण दिवस
इस मंगल अवसर पर क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी महाराज का मंगल अवतरण दिवस भी मनाया गया। मुनि संघ और आर्यिका संघ ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर शास्त्र भेंट किए। दोपहर में आहार चर्या के पश्चात आर्यिका संघ का मंगल विहार प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के लिए हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला, पुरुष और युवा धर्मावलंबी उपस्थित रहे।






