बड़वानी में विद्युत पेंशनर्स की हुंकार: पुराने कलेक्ट्रेट पर धरना, पेंशन भुगतान की ‘गारंटी’ और केंद्र के समान महंगाई राहत की मांग

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बड़वानी, 11 फरवरी 2026।

निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट)

​मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आज बड़वानी के पुराने कलेक्टर कार्यालय के समक्ष पेंशनर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने शासन के विरुद्ध अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट शब्दों में पेंशन भुगतान की सरकारी गारंटी और समय पर महंगाई राहत (DR) देने की मांग उठाई है।

भविष्य की अनिश्चितता से डरे पेंशनर्स

​धरना स्थल पर वक्ताओं ने पेंशन फंड की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला। पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2012 में पेंशन फंड के आकलन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 12 साल बाद भी स्थिति जस की तस है। नियमों के अनुसार लगभग 60,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जबकि फंड में अब तक मात्र 1,760 करोड़ रुपये ही जमा हो सके हैं। पेंशनर्स ने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में एक बार पेंशन भुगतान रुकने जैसी स्थिति बन चुकी है, जिससे उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।

“यह नई सुविधा नहीं, हक की लड़ाई है”: अनूप जोशी

​पेंशनर्स एसोसिएशन बड़वानी के अध्यक्ष अनूप जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन किसी नई सुविधा के लिए नहीं, बल्कि राजपत्र में प्रकाशित नियमों के पालन के लिए है। उन्होंने कहा कि “पेंशनर्स का जीवन पूरी तरह पेंशन पर निर्भर है। विद्युत उपभोक्ताओं से टैरिफ के माध्यम से राशि वसूलने के बावजूद पेंशनर्स को महंगाई राहत का लाभ कम और देरी से मिलना अन्यायपूर्ण है।”

प्रमुख आरोप और मांगे

​पेंशनर्स ने आरोप लगाया कि जुलाई 2019 से दिसंबर 2025 तक उन्हें केंद्र सरकार द्वारा घोषित दरों के अनुरूप भुगतान नहीं किया गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनकी मुख्य मांगे निम्नलिखित हैं:

  • ​राज्य शासन द्वारा पेंशन भुगतान की स्पष्ट लिखित गारंटी दी जाए।
  • ​केंद्र शासन द्वारा घोषित दर से समय पर महंगाई राहत का भुगतान हो।
  • ​पेंशन फंड में नियमों के अनुसार पर्याप्त राशि जमा की जाए।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

​प्रदर्शन के अंत में पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में प्रदेश भर में बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।