बड़वानी, 17 फरवरी 2026।
निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट)
बड़वानी जिले को केले के ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करने के लिए मंगलवार को एक दिवसीय ‘कृषि उन्नयन संवाद’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विशेषज्ञों, निर्यातकों और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के केले, मिर्च और डॉलर चने जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर वैश्विक बाजार से जोड़ना है।
कार्यक्रम में लोकसभा सांसद श्री गजेंद्र सिंह पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री बलवंत सिंह पटेल, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री प्रेम सिंह पटेल और कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह की विशेष मौजूदगी रही।
स्पॉटलेस और फ्रेश केले की बढ़ती मांग
अंतर्राष्ट्रीय केला विशेषज्ञ श्री के.बी. पाटिल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वह दौर चला गया जब ‘छींटे वाले केले’ को पकने की निशानी माना जाता था; अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब केवल बेदाग (स्पॉटलेस) और ताजे केले की मांग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस तरह बच्चों की देखभाल की जाती है, उसी तरह पैकिंग के दौरान केले की ‘फ्रूट केयर’ जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि केले की पैकिंग खेतों के बजाय पैक हाउस में होनी चाहिए ताकि उनकी गुणवत्ता लंबे समय तक बरकरार रहे।
निर्यात के वैश्विक अवसर और भारत की स्थिति
केला निर्यात विशेषज्ञ श्री अमोल महाजन ने बताया कि भारत दुनिया का 26 प्रतिशत केला पैदा करता है, लेकिन निर्यात में हम अभी 9वें स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से भारत से मिडिल ईस्ट देशों तक माल पहुँचाना आसान और कम समय लेने वाला है। उन्होंने पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ पैकिंग कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।
तकनीक और नवाचार का संगम
- किस्में और उत्पादकता: जिले में वर्तमान में 3,600 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है, जिसकी उत्पादकता 850 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
- मिर्च निर्यात: खरगोन के श्री अभिषेक पाटीदार ने मिर्च के एक्सपोर्ट, मार्केट चेन और जैविक खेती के महत्व पर जानकारी साझा की।
- प्रदर्शनी और सम्मान: कार्यक्रम स्थल पर कृषि और उद्यानिकी विभाग द्वारा उन्नत बीजों और यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही, पात्र किसानों को कृषि उपकरणों हेतु अनुदान सहायता राशि के प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
संवाद के दौरान जैन इरीगेशन के विशेषज्ञों और देश के प्रगतिशील किसानों ने टिश्यू कल्चर तकनीक और क्लाइमेट चेंज मॉडल पर अपने व्याख्यान दिए, जिससे कृषकों को आधुनिक खेती की नई दिशा मिली।









