बड़वानी में प्रशासनिक लापरवाही या लोकतंत्र पर हमला? जिंदा आदिवासियों को कागजों में ‘मरा’ बताकर मतदाता सूची से काटा जा रहा नाम

शेयर करे

बड़वानी, 08 जनवरी 2026

निमाड़ दस्तक न्यूज़ (विशेष रिपोर्ट):

बड़वानी जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। जागृत आदिवासी दलित संगठन ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे आदिवासियों के लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की साजिश करार दिया है। संगठन का दावा है कि जिले में कई जीवित ग्रामीणों को मतदाता सूची में ‘मृत’ घोषित कर उनके नाम काट दिए गए हैं।

जिंदा मतदाता कागजों में घोषित हुए ‘मृत’

हैरान कर देने वाला मामला तब सामने आया जब भाकीराम सोलंकी नामक युवक का नाम सूची से यह कहकर हटा दिया गया कि उसकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि वह पूरी तरह स्वस्थ और जीवित है। इसी तरह जाई गाँव के गुलसिंग भुरला, भिलीबाई, बाली और सुभद्रा जैसे कई ग्रामीणों के नाम भी सूची से नदारद हैं। पीपरकुंड के प्रताप मेहता और रेखा को “अनुपस्थित” बताकर बाहर कर दिया गया, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि वे सर्वे के समय गाँव में ही मौजूद थे।

सर्वे पर उठे सवाल: ऑनलाइन मैपिंग या जमीनी हकीकत?

संगठन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने बीएलओ को घर-घर जाकर सर्वे करने के बजाय ऑनलाइन मैपिंग के भरोसे काम करने पर मजबूर किया। जमीनी स्तर पर जांच न होने के कारण ग्रामीण कागजों में “मृत”, “अनुपस्थित” या “शिफ्टेड” दिखाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी हिंदी सूची अब तक न तो बूथ स्तर पर लगाई गई है और न ही तहसील या जनपद कार्यालय में, जिससे जनता को पता ही नहीं चल पा रहा है कि उनका वोट बचा है या नहीं।

संगठन की चेतावनी और मांग

जागृत आदिवासी दलित संगठन ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि यह सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है। संगठन ने मांग की है कि हटाए गए नामों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए और हर बूथ पर चिपकाई जाए। साथ ही गलत तरीके से काटे गए नामों की स्वतंत्र जांच कर पात्र नागरिकों के नाम तुरंत बहाल किए जाएं।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसे आदिवासी समाज को लोकतंत्र से बाहर करने की कोशिश माना जाएगा और इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।