बड़वानी, 19 फरवरी 2026।
(निमाड़ दस्तक न्यूज़ : ब्यूरो रिपोर्ट)
बड़वानी। केंद्र सरकार की नीतियों और बिजली के निजीकरण के विरोध में पाटी जनपद के आदिवासी किसानों ने हुंकार भरी है। ‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूछा कि विकास के नाम पर अगर अन्नदाता और मजदूर ही उजड़ रहे हैं, तो यह “विकसित भारत” आखिर किसके लिए बन रहा है?
बिजली निजीकरण और सब्सिडी खत्म करने का विरोध
किसानों ने बिजली संशोधन बिल का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इससे सब्सिडी खत्म हो जाएगी और दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में बिजली और भी महंगी हो जाएगी। किसानों का कहना है कि सरकारी खंभे और ट्रांसफॉर्मर जनता के पैसों से बने हैं, जिन्हें कंपनियों को देना गलत है।
व्यापार समझौतों और बीज बिल पर जताई आपत्ति
संगठन ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को किसान विरोधी करार दिया। किसानों का आरोप है कि विदेशी कृषि माल को छूट देने से देशी फसलों (सोयाबीन, मक्का और कपास) के दाम गिरेंगे, जैसा पिछले साल कपास के साथ हुआ था। वहीं, नए ‘बीज बिल 2026’ को लेकर भी चिंता जताई गई कि इसमें विदेशी कंपनियों को छूट दी गई है, जिससे नकली बीजों के कारण किसानों के ठगे जाने का खतरा बढ़ जाएगा।
भगोरिया हाट में अवैध शराब और सट्टे पर रोक की मांग
ज्ञापन के माध्यम से आदिवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आगामी भगोरिया हाट के दौरान वैध और अवैध शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही हाट में होने वाले जुआ-सट्टा, कम नाप-तौल और मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए ठोस कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि साल भर की मेहनत की कमाई हाट में शराब और अव्यवस्था के कारण बर्बाद हो जाती है।
पलायन और शोषण का मुद्दा गरमाया
संगठन के प्रतिनिधि हरसिंग जमरे और नासरी बाई ने कहा कि नीतियों के कारण किसान कर्ज में डूब रहे हैं और हजारों परिवार गुजरात-महाराष्ट्र पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की कि विकास वह होना चाहिए जिसमें किसान जिंदा रहे और मजदूरों को गांव में ही सम्मानजनक काम मिले।





