आलीराजपुर, 05 मार्च 2026।
निमाड़ दस्तक न्यूज़ (रफीक कुरैशी: ब्यूरो रिपोर्ट)
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र, जो बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की मजबूत नींव माने जाते हैं, आलीराजपुर जिले में अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ रहे हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है, जिससे शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ताले में कैद भविष्य, खंडहर में तब्दील हो रहे केंद्र
जिले के कई ग्रामीण अंचलों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। आलम यह है कि कार्यकर्ता और सहायिका अपनी मनमर्जी से केंद्र खोलते हैं, जिसके कारण बच्चों को मिलने वाला नाश्ता, भोजन और पोषण आहार अब ‘दूर की कौड़ी’ नजर आ रहा है। केंद्रों में साफ-सफाई का अभाव है और भवन खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं। कहीं पीने के पानी की टंकी खाली है तो कहीं नलों का पता ही नहीं है।
कागजों पर चल रहा है पोषण आहार का खेल
ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल सरकारी रिकॉर्ड में ही नियमित रूप से संचालित दिखाए जा रहे हैं। बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है। अधिकारियों के संरक्षण में चल रहे इस ‘कागजी खेल’ के कारण गरीब परिवारों के बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उन तक नहीं पहुँच पा रहा है।
कलेक्टर के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर नीतू माथुर ने आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन के कड़े निर्देश दिए हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी निरीक्षण के नाम पर महज औपचारिकता निभा रहे हैं। शासन की मंशा बच्चों को मीनू अनुसार नाश्ता और खेल-खिलौने मुहैया कराने की है, परंतु जमीनी स्तर पर स्थितियां इसके ठीक विपरीत हैं।
ग्रामीणों ने की औचक निरीक्षण की मांग
क्षेत्र के ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले की कलेक्टर स्वयं ग्रामीण अंचलों का औचक निरीक्षण करें, ताकि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और लापरवाह कर्मचारियों की पोल खुल सके और बच्चों के हक का पोषण आहार उन्हें मिल सके।






