बड़वानी, 19 फरवरी 2026।
निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 को जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश (JSAI) ने जनता की उम्मीदों के विपरीत बताया है। अभियान के सदस्यों का कहना है कि बजट में संख्यात्मक वृद्धि तो दिखती है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकताएं जनहित के बजाय निजी संस्थानों को फायदा पहुँचाने वाली प्रतीत हो रही हैं।
निजीकरण के मॉडल पर तीखी आपत्ति
जन स्वास्थ्य अभियान के साथियों ने वित्त मंत्री के उस बयान पर चिंता जताई है जिसमें धार, बैतूल और पन्ना में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए निजी संस्थानों से अनुबंध की बात कही गई है। अभियान के अनुसार, सरकारी जमीन निजी हाथों में सौंपना और स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण करना जनता के लिए घातक सिद्ध होगा। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन संस्थानों को लगभग निशुल्क जमीन देने से राज्य को क्या लाभ होगा।
बुनियादी समस्याओं की अनदेखी
अभियान के डॉ. जी. डी. वर्मा और मोहन सुल्या ने बताया कि बजट में सिलिकोसिस, कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं के लिए कोई विशेष नया प्रावधान नहीं है। सिकल सेल का बजट पिछले वर्ष की तरह ही 38.80 करोड़ पर स्थिर रखा गया है, जबकि इसके लिए अधिक आवंटन की जरूरत थी। इसी तरह, सिलिकोसिस पीड़ितों के लिए पेंशन या विशेष राहत की घोषणा न होना निराशाजनक है।
मानव संसाधन और बजट में कटौती
बजट विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के लिए पुनरीक्षित बजट 650 करोड़ से घटाकर 490 करोड़ कर दिया गया है। अभियान का आरोप है कि प्रदेश के अस्पताल डॉक्टरों और दवाइयों की भारी कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन मानव संसाधन की भर्ती के लिए बजट में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं की गई है। केवल भवन और मशीनों के अधोसंरचना निर्माण से स्वास्थ्य व्यवस्था तब तक नहीं सुधरेगी जब तक पर्याप्त स्टाफ मौजूद न हो।
जन स्वास्थ्य अभियान की प्रमुख मांगें:
- स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण तुरंत बंद कर सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत किया जाए।
- मातृ-शिशु स्वास्थ्य और व्यावसायिक रोगों (जैसे सिलिकोसिस) के लिए बजट बढ़ाया जाए।
- पिछले तीन वर्षों में विभागवार किए गए खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष स्वास्थ्य रणनीति बनाई जाए।




