आलीराजपुर के अंतिम भगोरिया में छिड़ा ‘सियासी संग्राम’, उमंग सिंघार ने पूछा- क्या आदिवासियों की “औकात” देखने आए हैं मंत्री?

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आलीराजपुर, 02 मार्च 2026।

निमाड़ दस्तक न्यूज़ (रफीक कुरैशी: ब्यूरो रिपोर्ट)

​आदिवासी बाहुल्य आलीराजपुर जिले के अंतिम भगोरिया मेले में सोमवार को लोक संस्कृति के रंगों के साथ-साथ राजनीति की गर्माहट भी जमकर देखने को मिली। मेले में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा रहा, जहाँ तीखे कटाक्ष और आरोप-प्रत्यारोपों ने उत्सव के माहौल को सियासी रंग दे दिया।

सिंघार का तीखा हमला: “औकात देखने आए हैं या माफी मांगने?”

​प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आलीराजपुर के सिनेमा चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान सिंघार पारंपरिक ढोल-मांदल की थाप पर जमकर थिरके और ‘कुर्राटी’ मारकर आदिवासी संस्कृति का उत्साह बढ़ाया। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दौरे पर कड़ा प्रहार किया। सिंघार ने सवाल उठाया कि “विजयवर्गीय आदिवासियों के बीच आकर क्या उनकी ‘औकात’ देखने आए हैं या फिर आदिवासियों से माफी मांगने आए हैं?” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

विजयवर्गीय का पलटवार: “खुशियाँ बांटने आया हूँ, राजनीति करने नहीं”

​दूसरी ओर, भाजपा की ओर से नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, वन मंत्री नागरसिंह चौहान और सांसद अनिता चौहान ने बस स्टैंड स्थित कार्यक्रम में भाग लिया। मंत्रियों ने ग्रामीणों के साथ पारंपरिक नृत्य किया और स्वयं मांदल बजाकर उत्सव का आनंद लिया। नेता प्रतिपक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “मैं यहाँ भगोरिया की खुशियाँ बांटने आया हूँ, अभी राजनीति करने नहीं आया हूँ। जहाँ जवाब देना होगा, वहाँ जवाब दिया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि भगोरिया आदिवासियों के प्रकृति प्रेम का प्रतीक है और सरकार इनकी संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बना भगोरिया

​आलीराजपुर का यह अंतिम भगोरिया एक प्रकार से शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया। कांग्रेस की ओर से उमंग सिंघार के साथ विधायक सेना पटेल, महेश पटेल और पुष्पराज पटेल ने मोर्चा संभाला, तो भाजपा की ओर से मंत्रियों के साथ जिलाध्यक्ष मकु परवाल और जिला पंचायत अध्यक्ष हजरीबाई खरत सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

​दोनों ही दलों के नेताओं ने ढोल की थाप पर नृत्य तो किया, लेकिन उनके बयानों ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में आदिवासी अंचल की राजनीति और भी गरमाने वाली है।