शिक्षा तंत्र पर भारी बोझ: कर्तव्यों के चक्रव्यूह में फंसे शिक्षक, जिलाध्यक्ष भंगुसिंह तोमर ने जताई गहरी चिंता

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आलीराजपुर 06 मई, 2026 |

निमाड़ दस्तक न्यूज़ (रफीक कुरैशी – ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️

आलीराजपुर। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की स्थिति आज अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गई है। शिक्षकों से एक ही समय में कई अलग-अलग मोर्चों पर कार्य करने की अपेक्षा की जा रही है, जिससे वे भारी मानसिक दबाव और कार्यभार के नीचे दबते जा रहे हैं। प्राथमिक-माध्यमिक-उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ (पीएमयूएमएस) के जिलाध्यक्ष भंगुसिंह तोमर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शिक्षा विभाग और प्रशासन के समक्ष शिक्षकों की इस विकट स्थिति को रखा है।

एक समय में चार-चार जिम्मेदारियों का बोझ

जिलाध्यक्ष भंगुसिंह तोमर ने बताया कि वर्तमान में शिक्षक एक साथ कई गंभीर दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। एक ओर प्रदेश में जनगणना का महत्वपूर्ण कार्य जारी है, तो दूसरी ओर बोर्ड परीक्षाएं अपने चरम पर हैं। इसी बीच विद्यार्थियों के शैक्षणिक सुधार के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त कक्षा 5वीं और 8वीं की पुनः परीक्षाओं की तैयारी का जिम्मा भी शिक्षकों के कंधों पर है।

अवकाश केवल कागजों तक सीमित

विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित होने के बावजूद शिक्षकों को राहत नहीं मिली है। इसी दौरान निर्वाचन कार्यालय द्वारा शिक्षकों को वोटर लिस्ट तैयार करने में लगा दिया गया है। साथ ही, शिक्षा विभाग आरटीई (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया और ‘स्कूल चलें हम’ सर्वे (VER) के काम में भी शिक्षकों की ड्यूटी लगा रहा है। शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा देने का विभागीय दबाव भी निरंतर बढ़ता जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो रही प्रभावित

शिक्षकों का कहना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों की अधिकता के कारण वे अपने मूल कर्तव्य यानी अध्यापन से दूर होते जा रहे हैं। जब शिक्षक का ध्यान पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक कार्यों और सर्वे में रहेगा, तो कक्षाओं में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होना निश्चित है। आलीराजपुर जिले के सभी छह ब्लॉकों के शिक्षकों में इस अत्यधिक दबाव को लेकर मानसिक तनाव और गहरा असंतोष देखा जा रहा है।

संतुलित कार्य वितरण की मांग

जिलाध्यक्ष तोमर ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि यदि शिक्षा व्यवस्था को वास्तव में मजबूत बनाना है, तो शिक्षकों को उनके मूल कार्य अध्यापन पर केंद्रित रहने दिया जाए। बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्यों में उनकी नियुक्ति शिक्षा के स्तर को गिरा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्यों का संतुलित वितरण नहीं किया गया, तो यह बढ़ता दबाव शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर गंभीर असर डालेगा।