अलीराजपुर: ई-फार्मेसी के विरोध में जिलेभर के मेडिकल स्टोर बंद, हाथ में पर्ची थामे भटकते रहे मरीज, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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अलीराजपुर 20 मई, 2026 |

निमाड़ दस्तक न्यूज़ (रफीक कुरैशी – ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️

​ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर बुधवार को अलीराजपुर जिलेभर के मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। दवा दुकानों पर ताले लटकने के कारण दिनभर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अपनी मांगों को लेकर दवा व्यापारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और कलेक्टर नीतू माथुर को ज्ञापन सौंपा।

दवाइयों के लिए भटकते रहे ग्रामीण, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं

​सुबह से ही जिला अस्पताल परिसर सहित शहर और ग्रामीण अंचलों की अधिकांश दवा दुकानों के बाहर ताले लगे नजर आए। इस दौरान दूर-दराज से आए मरीज और उनके परिजन हाथों में डॉक्टरों की पर्चियां लेकर भटकते दिखाई दिए। कोई बुखार की दवा के लिए परेशान रहा, तो कोई शुगर, बीपी और बच्चों की जरूरी दवाइयों के लिए इधर-उधर चक्कर काटता रहा।

​इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों से आए गरीब मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ा। ग्राम उमराली निवासी रामु ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे भारी किराया खर्च कर इलाज कराने जिला मुख्यालय पहुंचे थे, लेकिन यहां आकर पता चला कि सभी मेडिकल दुकानें बंद हैं। इसके चलते उन्हें बिना दवाई के ही मजबूरन वापस लौटना पड़ा। दिनभर ऐसे कई मरीज व्यवस्थाओं को लेकर अपनी नाराजगी जताते नजर आए।

ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे व्यापारियों को नुकसान और सुरक्षा का खतरा

​दवा संघ और मेडिकल संचालकों का कहना है कि ई-फार्मेसी यानी ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण छोटे और स्थानीय मेडिकल स्टोरों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त निगरानी और डॉक्टरों की उचित पर्ची के ऑनलाइन माध्यमों से धड़ल्ले से हो रही दवाओं की बिक्री मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकती है। इन्हीं गंभीर चिंताओं को लेकर केमिस्ट एसोसिएशन ने एकजुट होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर नीतू माथुर को ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण व प्रतिबंध लगाने की मांग की।

व्यापारियों और कंपनियों की लड़ाई में पिस रहा गरीब मरीज

​दवा दुकानों की इस एक दिवसीय हड़ताल से आम जनता में काफी आक्रोश भी देखा गया। पीड़ित लोगों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि दवा व्यापारियों और बड़ी ऑनलाइन कंपनियों की इस आपसी लड़ाई का सबसे बड़ा खमियाजा और नुकसान उन गरीब व बेबस मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जिनका इलाज पूरी तरह इन दवाइयों पर ही निर्भर है।