बड़वानी, 09 मार्च 2026।
(निमाड़ दस्तक न्यूज़ : ब्यूरो रिपोर्ट)
बड़वानी। जिला मुख्यालय से महज 16 किमी दूर अंजड़ थाने में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने एक उपनिरीक्षक (SI) और आरक्षक के विरुद्ध रिश्वत मांगने के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई आत्महत्या के एक पुराने मामले को रफा-दफा करने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत के बाद की गई है।
वॉइस रिकॉर्डिंग ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, अंजड़ निवासी और ज्वेलरी संचालक जयराज चौधरी ने 11 फरवरी को इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के सत्यापन के लिए लोकायुक्त टीम ने आवेदक को वॉइस रिकॉर्डर दिया था। 12 से 14 फरवरी के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग में आरोपियों द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। रिकॉर्डिंग के आधार पर लोकायुक्त ने सोमवार को उपनिरीक्षक महावीर चंदेल और आरक्षक पवन प्रजापति के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की।
डरा-धमकाकर मांगे थे 50 हजार रुपए
पूरा मामला लगभग एक साल पुराने भारत बर्फा नामक व्यक्ति की आत्महत्या से जुड़ा है। आवेदक जयराज चौधरी का आरोप है कि 24 जनवरी 2026 को एसआई महावीर चंदेल और आरक्षक पवन प्रजापति ने उन्हें न्यायालय के पास रोका। एसआई ने कहा कि “हमने तुम्हें इस केस में परेशान नहीं किया है, अब केस खत्म कर देंगे।” इसके बदले उन्होंने आरक्षक पवन के माध्यम से 50 हजार रुपए ‘खर्चा-पानी’ की मांग की। साथ ही धमकी दी कि अगर रुपए नहीं दिए तो केस में फंसा देंगे।
किस्तों में ली जा रही थी रिश्वत
लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि आवेदक ने आरक्षक पवन प्रजापति से संपर्क किया, तो आरक्षक ने 15,000 रुपए तुरंत ले लिए और बाकी 15,000 रुपए बाद में देने की बात तय हुई। यह पूरी बातचीत लोकायुक्त के रिकॉर्डर में कैद हो गई।
इन अधिकारियों की रही मुख्य भूमिका
लोकायुक्त महानिदेशक श्री योगेश देशमुख के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त इंदौर सुनील तालान, आरक्षक विजय कुमार, आशीष नायडू, रामेश्वर निंगवाल, कमलेश परिहार और आदित्य भदौरिया शामिल रहे। वर्तमान में मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।






