बड़वानी, 19 अप्रैल 2026।
निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️
देशभर में निर्माण कार्यों के लिए रेत और सीमेंट के अत्यधिक उपयोग से प्रकृति और नदियों पर बढ़ते दबाव के बीच, बड़वानी के राजघाट (कुकरा) पुनर्वास स्थल पर एक नई मिसाल पेश की गई है। यहाँ नाविक समाज के युवा पवन केवट का घर पूरी तरह वैकल्पिक और पारंपरिक तकनीक से बनाया गया है, जिसमें रेत-सीमेंट के बजाय मिट्टी, बांस, पत्थर और चूने का प्रमुखता से उपयोग किया गया है।
प्राकृतिक संसाधनों से बना ‘नर्मदाई’ निवास
पवन केवट के इस सुंदर और प्राकृतिक घर का निर्माण आर्किटेक्ट अनूप रंगोले और दीक्षा के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें तितली बहन का भी विशेष सहयोग रहा। इस घर को ‘नर्मदाई’ नाम दिया गया है, जिसका अर्थ है ‘सुख देने वाली वाटिका’। प्रकृति प्रेमी कलाकार संजय भोसले ने घर की दीवारों को नदी, प्रकृति और बिरसा मुंडा के रंग-बिरंगे चित्रों से सजाकर इसे जीवंत रूप दिया है।
कुदरत से खिलवाड़ पर मेधा पाटकर की चेतावनी
मकान के उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी मेधा पाटकर ने नई तकनीक के महत्व को समझाते हुए आगाह किया कि यदि हम कुदरत से खिलवाड़ करेंगे तो कुदरत भी बदला लेगी। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के उपयोग को आज की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उद्घाटन के दौरान कनकसिंह दरबार, हरिओम कुमावत, गजानन यादव, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिलाध्यक्ष अब्दुल सादिक चंदेरी, कमल यादव, प्रतीक पाढेन और कैलाश गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
सेवाभावी नाविक पवन के घर गूँजी शहनाई
पवन केवट वही जांबाज नाविक हैं, जिन्होंने साल 2019 में सरदार सरोवर की डूब के दौरान राजघाट के निवासियों, उनके मवेशियों और सामान को बचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। खास बात यह है कि जिस दिन उनके इस अनोखे घर का उद्घाटन हुआ, उसी दिन (19 अप्रैल) से उनकी शादी की रस्में भी मंडप और हल्दी के साथ शुरू हो गईं।
इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने इस न्यायपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक की सराहना की और इसे समाज में और अधिक प्रसारित करने का संकल्प लिया।








