आलीराजपुर, 09 अप्रैल 2026।
निमाड़ दस्तक न्यूज़ (रफीक कुरैशी – ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️
आलीराजपुर शहर की ऐतिहासिक धरोहर और रियासत कालीन शाही संपत्तियों के भविष्य को लेकर जिला न्यायालय ने एक बड़ा और दूरगामी आदेश पारित किया है। जिला न्यायाधीश (द्वितीय) श्री आर.पी. सेवोनिया की अदालत ने आलीराजपुर स्टेट की विवादित पैतृक संपत्तियों के हस्तांतरण, विक्रय या किसी भी प्रकार के अंतरण पर 6 महीने का सख्त स्थगन (Stay) लगा दिया है। न्यायालय के इस हस्तक्षेप से शहर की पहचान मानी जाने वाली संपत्तियां फिलहाल सुरक्षित हो गई हैं।
⚖️ राजसी विरासत पर उत्तराधिकार का कानूनी संघर्ष
यह पूरा विवाद आलीराजपुर स्टेट की उन संपत्तियों को लेकर है, जिनमें राजवाड़ा पैलेस परिसर और फतेह क्लब ग्राउंड जैसी ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं। आवेदक उदयभान सिंह और चंद्रभान सिंह (पुत्र स्व. महेंद्र प्रताप सिंह राठौर) ने अदालत में दावा किया कि यह संपूर्ण संपत्ति संयुक्त हिंदू परिवार (HUF) की अविभाजित पैतृक संपत्ति है, जिसमें पूर्व महाराजा प्रतापसिंह जी के चारों पुत्रों की समान हिस्सेदारी बनती है। आवेदकों का आरोप है कि संदिग्ध वसीयत के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण कर इन संपत्तियों को बेचने की तैयारी की जा रही थी।
️ कोर्ट का विश्लेषण और ऐतिहासिक हस्तक्षेप
न्यायालय ने अपने आदेश में तीन प्रमुख कानूनी आधारों—प्रथम दृष्टया मामला, सुविधा का संतुलन और अपूर्णनीय क्षति—को प्राथमिकता दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस स्तर पर संपत्ति का हस्तांतरण होता है, तो नए पक्षकार जुड़ेंगे जिससे मुकदमा जटिल हो जाएगा और ऐसी क्षति होगी जिसकी भरपाई असंभव है। यह अंतरिम आदेश फिलहाल अनावेदक तुषार सिंह पर लागू किया गया है, जिन्हें 6 माह तक संपत्ति के स्वरूप में बदलाव या विक्रय से रोका गया है।
तुषार सिंह का पक्ष
दूसरी ओर, अनावेदक तुषार सिंह का तर्क है कि यह महाराजा सुरेंद्र सिंह की व्यक्तिगत संपत्ति थी, जो उन्हें भारत सरकार के साथ हुए विलय अनुबंध (Merger Agreement) के तहत प्राप्त हुई थी। उनका दावा है कि वे वैध वसीयत के आधार पर इस संपत्ति के एकमात्र स्वामी हैं। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखना न्यायसंगत माना है।
जनता में खुशी की लहर और धरोहर संरक्षण की उम्मीद
इस फैसले के बाद आलीराजपुर के नागरिकों और जागरूक मंचों में हर्ष का माहौल है। जागरूक नागरिक मंच के अध्यक्ष विक्रम सेन सहित शहर के गणमान्य नागरिकों, पार्षदों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसे जनहित और सांस्कृतिक धरोहर की जीत बताया है। नागरिकों का मानना है कि इस आदेश से शहर की ऐतिहासिक पहचान को निजी हाथों में जाने से बचाने की उम्मीद जागी है।




